अथ प्रथमोऽध्यायः- अर्जुनविषादयोग
    दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों और अन्य महान वीरों का वर्णन धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥1-1॥   dhṛtarāṣṭra uvāchadharmakṣētrē kurukṣētrē samavētā yuyutsavaḥ.māmakāḥ pāṇḍavāścaiva kimakurvata sañjaya৷৷1.1৷৷ भावार्थ : धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥1॥ संजय उवाच दृष्टवा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसंगम्य...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 11:29:28 0 82
    अथ द्वितीयोऽध्यायः ~ सांख्ययोग
    अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद संजय उवाच तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्‌ ।विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥2.1॥ sañjaya uvāchatam tathā kripayā.vistamaśrupūrnākulēkchhanam.visīdantamidam vākyamuvāca madhusūdanah৷৷2.1৷৷ भावार्थ : संजय बोले- उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोकयुक्त उस अर्जुन के प्रति भगवान मधुसूदन ने यह वचन कहा॥1॥ श्रीभगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्‌...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 11:15:36 0 79
    अथ तृतीयोऽध्यायः- कर्मयोग
    ज्ञानयोग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की आवश्यकता अर्जुन उवाच ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन । तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥ arjuna uvāchajyāyasī cētkarmanastē matā buddhirjanārdana.tatkim karmani ghōrē mān niyōjayasi kēśava৷৷3.1৷৷ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे जनार्दन! यदि आपको कर्म की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ मान्य है तो फिर हे केशव! मुझे भयंकर कर्म में क्यों लगाते हैं?॥1॥ व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे । तदेकं वद निश्चित्य येन...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 11:07:58 0 83
    अथ चतुर्थोऽध्यायः- ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
    योग परंपरा, भगवान के जन्म कर्म की दिव्यता, भक्त लक्षण भगवत्स्वरूप  श्री भगवानुवाच इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ ।विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥ śrī bhagavānuvāchaimam vivasvatē yōgam prōktavānahamavyayam.vivasvān manavē prāha manurikchhvākavē.bravīt৷৷4.1৷৷ भावार्थ : श्री भगवान बोले- मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा॥1॥ एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः ।स...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 10:57:48 0 83
    अथ पंचमोऽध्यायः- कर्मसंन्यासयोग
    ज्ञानयोग और कर्मयोग की एकता, सांख्य पर का विवरण और कर्मयोग की वरीयता अर्जुन उवाच सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि ।यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्‌ ॥ arjuna uvācha sannyāsam karmanām krishna punaryōgam ca śansasi. yacchrēya ētayōrēkam tanmē brūhi suniśicatam৷৷5.1৷৷ भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे लिए भलीभाँति निश्चित कल्याणकारक साधन हो, उसको कहिए॥1॥   श्रीभगवानुवाच...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 10:52:27 0 85
    अथ षष्ठोऽध्यायः- आत्मसंयमयोग
    कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ के लक्षण, काम-संकल्प-त्याग का महत्व श्रीभगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः ।स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥ śrī bhagavānuvācha anāśritah karmaphalam kāryam karma karōti yah. sa sannyāsī ca yōgī ca na niragnirna cākriyah৷৷6.1৷৷ भावार्थ : श्री भगवान बोले- जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 10:48:20 0 89
    अथ सप्तमोऽध्यायः- ज्ञानविज्ञानयोग
    विज्ञान सहित ज्ञान का विषय,इश्वर की व्यापकता श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ śrī bhagavānuvācamayyāsaktamanāḥ pārtha yōgaṅ yuñjanmadāśrayaḥ.asaṅśayaṅ samagraṅ māṅ yathā jñāsyasi tacchṛṇu৷৷7.1৷৷ भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्त चित तथा अनन्य भाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्यादि गुणों से युक्त, सबके आत्मरूप मुझको संशयरहित...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 09:18:56 0 83
    अथाष्टमोऽध्यायः- अक्षरब्रह्मयोग
    ब्रह्म, अध्यात्म और कर्मादि के विषय में अर्जुन के सात प्रश्न और उनका उत्तर अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते৷৷8.1৷৷ arjuna uvāchakiṅ tadbrahma kimadhyātmaṅ kiṅ karma puruṣōttama.adhibhūtaṅ ca kiṅ prōktamadhidaivaṅ kimucyatē৷৷8.1৷৷ भावार्थ : अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत नाम से क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैं॥8.1॥ अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन ।...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-14 09:14:42 0 91
    अथ नवमोऽध्यायः- राजविद्याराजगुह्ययोग
    परम गोपनीय ज्ञानोपदेश, उपासनात्मक ज्ञान, ईश्वर का विस्तार श्रीभगवानुवाच इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌॥9.1॥   śrī bhagavānuvācha idaṅ tu tē guhyatamaṅ pravakṣyāmyanasūyavē. jñānaṅ vijñānasahitaṅ yajjñātvā mōkṣyasē.śubhāt৷৷9.1৷৷   भावार्थ : श्री भगवान बोले- तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भली भाँति कहूँगा, जिसको जानकर तू दुःखरूप संसार से मुक्त हो जाएगा॥1॥...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-13 22:03:54 0 92
    अथ दशमोऽध्याय:- विभूतियोग
    भगवान की विभूति और योगशक्ति का कथन तथा उनके जानने का फल श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ৷৷10.1৷৷ śrī bhagavānuvācha bhūya ēva mahābāhō śrṛṇu mē paramaṅ vacaḥ. yattē.haṅ prīyamāṇāya vakṣyāmi hitakāmyayā৷৷10.1৷৷ भावार्थ : श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझे अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए हित की इच्छा से कहूँगा॥10.1॥ न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः । अहमादिर्हि देवानां...
    By Abhay Ranjan Sharma 2020-04-13 22:01:35 0 89
More Articles
Categories
Read More
भीष्म पर्व ~ महाभारत
भीष्म पर्व में कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए सन्नद्ध दोनों पक्षों की सेनाओं में...
By Abhay Ranjan Sharma 2020-03-22 15:29:13 0 93
जय माँ भारती
जय माँ भारती
By R K Jha 2020-03-12 13:23:59 0 93
Vice President tweets on #CivilServicesDay
आज सिविल सेवा दिवस के अवसर पर, राष्ट्र को कोविड 19 संक्रमण से निरापद रखने में निष्ठापूर्वक...
By Hindu Live News 2020-04-21 04:52:21 0 34
छाछ (Buttermilk) के 9 सेहत और सौंदर्य लाभ, जरूर जानें
छाछ और लस्सी का सेवन खूब किया जाता है। स्वाद में तो यह मजेदार लगता ही है, शरीर में ठंडक भी...
By Shailendra Kaushik 2020-04-01 10:00:44 0 87
Unique Culture of India : Customs & Indian Traditions
Indian Dances India is a land of 'unity in diversity', and our dances are no different. Different...
By Sonia Sharma 2020-04-25 15:03:00 0 27